बिहार में लागू पूर्ण शराबबंदी कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए राज्य सरकार और मद्य निषेध विभाग ने वर्ष 2025 में बड़े स्तर पर कार्रवाई की है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से नवंबर 2025 के बीच राज्य भर में 33 लाख 30 हजार लीटर से अधिक अवैध शराब जब्त की गई है। इसके साथ ही, शराब तस्करी और अवैध कारोबार से जुड़े 48,955 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस दौरान 169 ट्रकों सहित सैकड़ों वाहन भी जब्त किए गए हैं।
राज्य सरकार का कहना है कि शराबबंदी को लेकर किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जा रही है। हर महीने औसतन लगभग 3 लाख लीटर अवैध शराब पकड़ी गई, जिससे यह साफ होता है कि प्रशासन की निगरानी और कार्रवाई लगातार जारी है।
देशी और विदेशी दोनों तरह की शराब जब्त
मद्य निषेध इकाई की रिपोर्ट के मुताबिक, जब्त की गई शराब में देशी और विदेशी दोनों प्रकार की शराब शामिल है। अधिकारियों के अनुसार, अवैध शराब की तस्करी के लिए संगठित नेटवर्क काम कर रहे थे, जिन्हें चिन्हित कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई। कई मामलों में शराब निर्माण, भंडारण और परिवहन के ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई।
सीमावर्ती राज्यों से हो रही तस्करी
प्रशासन के अनुसार, बिहार में शराब की बिक्री और सेवन पर प्रतिबंध होने के कारण पड़ोसी राज्यों झारखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल से अवैध शराब की तस्करी के प्रयास सामने आते रहते हैं। इन राज्यों की सीमाओं से शराब लाकर बिहार में खपाने की कोशिश की जाती है। इसे रोकने के लिए सीमावर्ती जिलों में चेक पोस्ट और निगरानी को और सख्त किया गया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ट्रकों और बड़े वाहनों के साथ-साथ अब तस्कर छोटी गाड़ियों, बाइकों और यहां तक कि पैदल रास्तों का भी इस्तेमाल करने लगे थे। इसी कारण 474 छोटी गाड़ियों और बाइकों को जब्त किया गया है।
तस्करों और सप्लायरों पर कार्रवाई
कार्रवाई के दौरान केवल शराब बरामद ही नहीं की गई, बल्कि अवैध कारोबार से जुड़े तस्करों, सप्लायरों और धंधेबाजों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया गया। कुल 48,955 गिरफ्तारियां यह दर्शाती हैं कि शराबबंदी कानून के उल्लंघन पर प्रशासन ने कठोर रुख अपनाया है। कई मामलों में आरोपियों के खिलाफ कड़ी धाराओं में केस दर्ज किए गए हैं।
अपराध दर में कमी का दावा
सरकार और पुलिस प्रशासन का दावा है कि शराबबंदी के कारण राज्य में अपराध के मामलों में गिरावट दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2024 की तुलना में 2025 में नवंबर तक
हत्या के मामलों में 7.72 प्रतिशत,
डकैती के मामलों में 24.87 प्रतिशत,
दंगा और हिंसा के मामलों में 17.97 प्रतिशत की कमी आई है। अधिकारियों का मानना है कि शराब से जुड़े अपराधों और घरेलू हिंसा जैसी घटनाओं में भी कमी देखी गई है, हालांकि इस पर अलग-अलग सामाजिक संगठनों की राय भिन्न हो सकती है।
405 कुख्यात अपराधियों की संपत्ति जब्त करने की तैयारी
शराब तस्करी और अवैध कारोबार से जुड़े अपराधियों पर आर्थिक शिकंजा कसने के लिए सरकार ने 405 कुख्यात अपराधियों की संपत्ति जब्त करने का प्रस्ताव तैयार किया है। यह प्रस्ताव संबंधित अदालतों को भेजा गया है। अधिकारियों के अनुसार, इनमें से 70 मामलों में संपत्ति जब्ती की प्रक्रिया चल रही है, जबकि कुछ मामलों में अदालत से आदेश भी मिल चुके हैं। प्रशासन का मानना है कि केवल गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि अवैध कमाई पर रोक लगाने से तस्करी के नेटवर्क को कमजोर किया जा सकता है।
पुलिस और प्रशासन की रणनीति
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, राज्यभर में विशेष टीमें गठित की गई हैं, जो शराब तस्करी से जुड़े नेटवर्क पर नजर रख रही हैं। तकनीकी निगरानी, खुफिया सूचनाओं और नियमित छापेमारी के माध्यम से अवैध कारोबार पर लगाम लगाने की कोशिश की जा रही है। इसके साथ ही, आम लोगों से भी अपील की गई है कि वे अपने क्षेत्र में शराब की अवैध बिक्री या भंडारण की सूचना प्रशासन को दें। अधिकारियों का कहना है कि सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
आगे भी जारी रहेगी कार्रवाई
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि शराबबंदी कानून के उल्लंघन को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आने वाले महीनों में भी अभियान जारी रहेगा और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई को और सख्त किया जाएगा। सरकार का दावा है कि शराबबंदी केवल कानून व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि सामाजिक सुधार से भी जुड़ा हुआ है। इसी उद्देश्य से प्रशासन इसे प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दे रहा है।

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