भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देशभर के बैंकों के कामकाज को और अधिक पारदर्शी व सुरक्षित बनाने के लिए नए नियमों का मसौदा जारी किया है। आरबीआई ने 238 बैंकों के लिए 20 बड़े बदलावों का प्रस्ताव दिया है और इन पर 10 नवंबर तक आम लोगों से सुझाव मांगे हैं। ये सभी नियम अप्रैल 2026 से लागू हो जाएंगे। यह पहली बार है जब आरबीआई ने बैंकिंग नियमों का ड्राफ्ट आम जनता के सामने रखकर उनसे राय मांगी है।
केंद्रीय बैंक का कहना है कि इसका उद्देश्य उपभोक्ता हितों की रक्षा करना और बैंकिंग सेक्टर को आधुनिक जरूरतों के अनुसार अपडेट करना है। साइबर फ्रॉड पर नई सख्ती 3 दिन में जानकारी देना जरूरी सबसे बड़ा बदलाव साइबर फ्रॉड से जुड़ा है।
खातों की निष्क्रियता पर सख्ती
आरबीआई के नए प्रस्ताव में लॉकर सुरक्षा को लेकर भी कड़ा नियम लाया गया है। अब अगर बैंक लॉकर से चोरी या नुकसान की भरपाई नहीं कर पाता, तो उसे ग्राहक को 100 गुना तक मुआवजा देना होगा। इसके अलावा, बैंक खातों की निष्क्रियता अवधि भी तय की गई है सामान्य खाते 10 साल, मध्यम जोखिम वाले खाते 8 साल, और उच्च जोखिम वाले खाते केवल 2 साल तक निष्क्रिय रह सकेंगे। इसके बाद खातों को केवाईसी अपडेट कराना अनिवार्य होगा।
लोन ब्याज जोर
नए नियमों में यह भी प्रावधान है कि सभी बैंकों को एक एकीकृत लोन प्लेटफॉर्म बनाना होगा, जहां ब्याज दरें सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होंगी। इससे ग्राहकों को अलग-अलग बैंकों की दरों की तुलना करने में सुविधा होगी और लोन प्रोसेस में पारदर्शिता बढ़ेगी। कम अवधि वाले लोन के लिए अब 3 साल से कम अवधि के लिए एमसीएलआर रेट में कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा। वरिष्ठ नागरिकों के लिए बैंकिंग को सरल बनाने के भी प्रावधान हैं। 70 वर्ष से ऊपर के ग्राहकों को अब कई प्रक्रियाओं में छूट मिलेगी और उन्हें अतिरिक्त दस्तावेजों की आवश्यकता नहीं होगी।
घोषणाओं में पारदर्शिता
गोल्ड लोन नीति में बदलाव के तहत अब ग्राहक की उपस्थिति में ही सोने का मूल्यांकन किया जाएगा और पूरी प्रक्रिया को रिकॉर्ड किया जाएगा। इससे धोखाधड़ी की संभावना घटेगी। वहीं निजी क्षेत्र के बैंकों को अपनी वेतन और संपत्ति घोषणाओं को सार्वजनिक करना होगा, ताकि पारदर्शिता बढ़े।
कैसे दें अपने सुझाव
आम नागरिक www.rbi.org.in पर जाकर अपने सुझाव दे सकते हैं। ‘What’s New’ सेक्शन में जाकर 238 बैंकों के मसौदे को पढ़ा जा सकता है और अपनी राय 10 नवंबर तक ऑनलाइन भेजी जा सकती है। कुल मिलाकरआरबीआई के ये प्रस्ताव बैंकिंग प्रणाली को अधिक जवाबदेह और ग्राहक-केंद्रित बनाने की दिशा में बड़ा कदम माने जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर फ्रॉड नियंत्रण और डिजिटल सुरक्षा पर यह सबसे मजबूत पहल है, जिससे बैंकिंग क्षेत्र में ग्राहकों का भरोसा और बढ़ेगा।
देरी पर ₹25,000 का जुर्माना
प्रस्तावित नियमों के मुताबिक, यदि किसी ग्राहक के खाते से साइबर फ्रॉड होता है और वह तीन दिन के भीतर बैंक को सूचना देता है, तो बैंक उस नुकसान की भरपाई करने के लिए जिम्मेदार होगा। लेकिन यदि ग्राहक देरी करता है या सूचना देने में लापरवाही बरतता है, तो बैंक जिम्मेदार नहीं माना जाएगा। ऐसे मामलों में ग्राहक को खुद नुकसान उठाना पड़ सकता है। देरी से सूचना देने वालों पर ₹25,000 तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। आरबीआई का मानना है कि इस कदम से बैंक और ग्राहक दोनों स्तर पर सतर्कता बढ़ेगी और साइबर अपराधों पर नियंत्रण पाया जा सकेगा।
