बिहार में चुनाव का माहौल बन चुका है। हर तरफ पोस्टर, बैनर, भाषण और वादे दिखाई दे रहे हैं। हर पार्टी दावा कर रही है कि वही जनता की सच्ची हितैषी है। लेकिन इस शोर-शराबे के बीच बहुत से लोग ऐसे भी हैं जिन्हें कोई नेता या उम्मीदवार पसंद नहीं आ रहा। ऐसे लोग एक ही विकल्प चुनते हैं कि वह चुनाव के दिन वोट देने ही नहीं जाते हैं। जिससे उनके सोच से कोई अवगत ही नहीं हो पता कि आखरी वह वोट क्यों नहीं देना चाहते हैं। सिवान रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के आने का इंतज़ार कर रहे ऐसे ही कई वोटरों से बात हुई जो छठ पूजा खत्म होने के दूसरे दिन परदेश कमाने के लिए जा रहे हैं। उनमे से राकेश कुमार का कहना हैं कि हमको कोई नेता पसंद ही नही हैं तो फिर वोट किसे दे। चाहे जेडीयू हो या आरजेडी दोनों पार्टी के नेता में कोई अंतर नहीं हैं। पिछले 30 साल से बारी- बारी से इसी दोनों पार्टी को वोट देते आ रहे हैं लेकिन नेता चुनाव जीतने के बाद दिखाई ही नहीं देते, विकास का काम करना तो दूर की बात हैं। महाराजगंज विधानसभा 2020 में कांग्रेस पार्टी के नेता को विधायक बनाया था लेकिन पाँच साल बीत गया विकास का कोई काम नहीं हुआ हैं। 2015 में जेडीयू के विधायक बने थे उन्होने भी क्षेत्र के विकास के लिए कुछ नहीं किया। 

अगर आप को भी राकेश कुमार कि तरह ही लग रहा हैं कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 अबकी बार किसे वोट दें? कोई भी नेता भरोसे के लायक नहीं है। ऐसे लोगों के लिए एक विकल्प मौजूद हैं, जिस पर बटन दबाकर अपनी नाराजगी दर्ज करा सकते हैं। यह एक असरदार और आसान तरीका है वह है नोटा का विकल्प।

NOTA नोटा का मतलब होता है None of the Above यानी इनमें से कोई नहीं। जब आप वोट डालने EVM वोटिंग मशीन पर जाते हैं, तो सबसे नीचे एक बटन होता है गुलाबी रंग का  उस पर लिखा होता है नोटा। अगर आपको लगता है कि कोई भी उम्मीदवार अच्छा नहीं है, किसी पर भरोसा नहीं है, तो आप उस बटन को दबा सकते हैं। इससे आपका वोट बेकार नहीं जाता, बल्कि ये बताता है कि हम वोट देना चाहते हैं, लेकिन किसी को योग्य नहीं मानते। यानी यह एक शांतिपूर्ण विरोध का तरीका है।

हमारे देश में पहले ऐसा नहीं था। अगर कोई उम्मीदवार पसंद नहीं होता था, तो लोग वोट ही नहीं देते थे। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने ये हक दिया है कि अगर कोई उम्मीदवार पसंद नहीं है, तो भी आप वोट डाल सकते हैं नोटा के ज़रिए। ये इसलिए ज़रूरी है ताकि नेताओं को भी पता चले कि जनता बेवकूफ नहीं है। अगर वे गलत लोगों को टिकट देंगे, तो जनता उन्हें रिजेक्ट कर देगी। नोटा का मतलब है। हम लोकतंत्र पर भरोसा रखते हैं, लेकिन हमें ईमानदार नेता चाहिए।

बिहार के पिछले चुनाव में भी बहुत सारे लोगों ने नोटा का बटन दबाया था। गांव हो या शहर, पढ़े-लिखे हो या मज़दूर  सबको अब इसका मतलब समझ में आने लगा है। लोग अब वोट नहीं देने के बजाय कहते हैं हम वोट देंगे, लेकिन किसी को नहीं, नोटा को 2025 के चुनाव में यह संख्या और बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि लोगों में नाराज़गी है। बेरोज़गारी बढ़ी है, पढ़ाई और स्वास्थ्य की हालत खराब है, भ्रष्टाचार से लोग परेशान हैं। ऐसे में जब कोई भरोसेमंद चेहरा नहीं दिखता, तो लोग कहते हैं भाई, अगर कोई नेता काम का नहीं है, तो नोटा दबाना ही सही है।

वोटिंग के दिन जब आप EVM मशीन के पास जाएंगे, तो हर उम्मीदवार का नाम और चुनाव चिन्ह दिखाई देगा। सबसे नीचे एक गुलाबी बटन होगा उस पर लिखा होगा नोटा अगर आप उसे दबाते हैं, तो मशीन एक बीप की आवाज़ करेगी इसका मतलब आपका वोट दर्ज हो गया है। आपका वोट अब किसी नेता के खाते में नहीं जाएगा, लेकिन रिकॉर्ड में रहेगा कि आपने वोट डाला और किसी को पसंद नहीं किया।

नोटा दबाने का मतलब यह नहीं कि आप वोटिंग से भाग रहे हैं। बल्कि यह दिखाता है कि आप जागरूक नागरिक हैं। आप सिस्टम का हिस्सा हैं और आप गलत को स्वीकार नहीं करते। जैसे अगर स्कूल में सारे बच्चे कॉपी करते हैं और एक बच्चा कहता है मैं नहीं करूंगा, तो वही सही रास्ते पर है।वैसे ही, अगर सारे नेता वादे करके धोखा देते हैं, तो नोटा दबाने वाला वोटर कहता है अब बहुत हुआ, हमें सही नेता चाहिए।

पहले माना जाता था कि नोटा सिर्फ शहरों में लोग जानते हैं। लेकिन अब गांवों में भी लोग इसके बारे में बात करने लगे हैं। कई सामाजिक संगठन और कॉलेज के छात्र गांवों में जाकर बताते हैं कि नोटा दबाना भी वोट देना है। सीवान, गया, और भागलपुर जैसे जिलों में युवाओं ने गांव-गांव घूमकर लोगों को समझाया है कि अगर नेता काम नहीं करता, तो अगली बार नोटा दबाकर जवाब दो।

कई लोग पूछते हैं कि अगर नोटा को सबसे ज्यादा वोट मिल जाए,तो क्या चुनाव रद्द हो जाता है? अभी भारत में ऐसा कानून नहीं है। भले ही नोटा को सबसे ज्यादा वोट मिलें, फिर भी दूसरा सबसे ज्यादा वोट पाने वाला उम्मीदवार जीत जाता है। लेकिन इसका असर बड़ा होता है। अगर किसी सीट पर हज़ारों लोग नोटा दबाते हैं, तो अगली बार राजनीतिक पार्टियां सोचती हैं कि इस क्षेत्र में लोग नाराज़ हैं, अब हमें कुछ बदलना होगा।

सीधे तौर पर चुनाव का नतीजा नहीं बदलता,लेकिन माहौल बदल जाता है। पार्टियों को समझ आता है कि अब जनता चुप नहीं बैठेगी। अब लोग जात-पात, धर्म, या लालच में वोट नहीं देंगे, बल्कि सोच-समझकर फैसला लेंगे। धीरे-धीरे यही सोच बदलाव लाएगी। अगर हर बार गलत नेता को अस्वीकार किया जाएगा, तो एक दिन पार्टियां मजबूर होंगी कि वे सही उम्मीदवार लाएं।

बिहार चुनाव 2025 में अगर आपको कोई नेता पसंद नहीं आता, तो घर पर बैठने से बेहतर है कि वोट डालने जाइए और नोटा दबाइए। इससे आप लोकतंत्र में अपनी आवाज़ दर्ज कराते हैं। याद रखिए जो वोट नहीं देता, उसकी बात कोई नहीं सुनता। जो नोटा दबाता है, वो भी अपनी बात कहता है साफ और सधे तरीके से।

यह जनता की नाराज़गी का सबसे सटीक और शांतिपूर्ण तरीका है। यह बताता है कि जनता अब जाग चुकी है। अब लोग नेताओं के जुमलों से नहीं, उनके काम से वोट देंगे। बिहार की जनता समझदार है। वोट उसकी ताकत है। अगर कोई नेता आपको पसंद नहीं, तो वोट ज़रूर डालिए लेकिन नोटा दबाकर बताइए कि अब पुराने ढर्रे की राजनीति नहीं चलेगी क्योंकि लोकतंत्र तभी मजबूत होता है, जब जनता बोलती है हम चुप नहीं रहेंगे, हम सोचकर वोट देंगे।

नोटा दबाने के फायदे

  • नेताओं को चेतावनी मिलती है – अगर किसी इलाके में बहुत लोग नोटा दबाते हैं, तो पार्टियों को समझ आता है कि लोग नाराज़ हैं। अगली बार वे अच्छे उम्मीदवार लाने की कोशिश करते हैं। 2.
  • जनता की राय जाहिर होती है -यह बताता है कि जनता अब आंख मूंदकर वोट नहीं दे रही। वह सोच-समझकर फैसला ले रही है।
  • लोकतंत्र मजबूत होता है – जब जनता बोलती है, “मुझे कोई नहीं पसंद तो यह राजनीति को साफ-सुथरा बनाने की दिशा में एक कदम है।

 

अगर आप को भी राकेश कुमार कि तरह ही लग रहा हैं कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 अबकी बार किसे वोट दें? कोई भी नेता भरोसे के लायक नहीं है। ऐसे लोगों के लिए एक विकल्प मौजूद हैं, जिस पर बटन दबाकर अपनी नाराजगी दर्ज करा सकते हैं। यह एक असरदार और आसान तरीका है वह है नोटा का विकल्प।

हमारे देश में पहले ऐसा नहीं था। अगर कोई उम्मीदवार पसंद नहीं होता था, तो लोग वोट ही नहीं देते थे। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने ये हक दिया है कि अगर कोई उम्मीदवार पसंद नहीं है, तो भी आप वोट डाल सकते हैं नोटा के ज़रिए। ये इसलिए ज़रूरी है ताकि नेताओं को भी पता चले कि जनता बेवकूफ नहीं है। अगर वे गलत लोगों को टिकट देंगे, तो जनता उन्हें रिजेक्ट कर देगी। नोटा का मतलब है। हम लोकतंत्र पर भरोसा रखते हैं, लेकिन हमें ईमानदार नेता चाहिए।बिहार के पिछले चुनाव में भी बहुत सारे लोगों ने नोटा का बटन दबाया था। गांव हो या शहर, पढ़े-लिखे हो या मज़दूर  सबको अब इसका मतलब समझ में आने लगा है। लोग अब वोट नहीं देने के बजाय कहते हैं हम वोट देंगे, लेकिन किसी को नहीं, नोटा को 2025 के चुनाव में यह संख्या और बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि लोगों में नाराज़गी है। बेरोज़गारी बढ़ी है, पढ़ाई और स्वास्थ्य की हालत खराब है, भ्रष्टाचार से लोग परेशान हैं। ऐसे में जब कोई भरोसेमंद चेहरा नहीं दिखता, तो लोग कहते हैं भाई, अगर कोई नेता काम का नहीं है, तो नोटा दबाना ही सही वोटिंग के दिन जब आप EVM मशीन के पास जाएंगे, तो हर उम्मीदवार का नाम और चुनाव चिन्ह दिखाई देगा। सबसे नीचे एक गुलाबी बटन होगा उस पर लिखा होगा नोटा अगर आप उसे दबाते हैं, तो मशीन एक बीप की आवाज़ करेगी इसका मतलब आपका वोट दर्ज हो गया है। आपका वोट अब किसी नेता के खाते में नहीं जाएगा, लेकिन रिकॉर्ड में रहेगा कि आपने वोट डाला और किसी को पसंद नहीं किया।