पूर्व आईएएस अधिकारी कन्नन गोपीनाथन ने सोमवार को कांग्रेस पार्टी का दामन थाम लिया। उन्होंने दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल और प्रवक्ता पवन खेड़ा की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। गोपीनाथन के कांग्रेस में शामिल होने को राजनीतिक हलकों में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है, खासकर 2025 के विधानसभा चुनावों से पहले।
2019 में अनुच्छेद 370 के विरोध में दिया था इस्तीफा
कन्नन गोपीनाथन 2012 बैच के आईएएस अधिकारी रहे हैं और देशभर में तब सुर्खियों में आए जब उन्होंने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के सरकार के फैसले के विरोध में 2019 में इस्तीफा दे दिया था। उस समय उन्होंने कहा था कि “कश्मीर में जिस तरह लोगों की आज़ादी और संवाद को रोका गया, वह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
कांग्रेस शामिल होते समय कही यह बात
कांग्रेस जॉइन करते हुए गोपीनाथन ने कहा, “मैंने कांग्रेस में जाने का निर्णय तब लिया जब मुझे अहसास हुआ कि यही पार्टी सही फैसले ले सकती है। देश में आज लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की सबसे अधिक जरूरत है।” उन्होंने आगे कहा कि अब वे संगठनात्मक रूप से पार्टी के साथ जुड़कर आम जनता के मुद्दों को उठाने का काम करेंगे।
सिर्फ कांग्रेस ही देश को सही दिशा में ले जा सकती है”
न्यूज़ एजेंसी ANI से बातचीत में गोपीनाथन ने बताया कि उन्होंने सर्विस छोड़ने के बाद कई राज्यों का दौरा किया, नेताओं और नागरिकों से मुलाकात की। “इस दौरान मुझे साफ समझ में आया कि सिर्फ कांग्रेस ही वह पार्टी है जो देश को सही दिशा में ले जा सकती है,” उन्होंने कहा।
लोकतंत्र पर उठाए सवाल
गोपीनाथन ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटाना सरकार का निर्णय हो सकता है, लेकिन “पूरे राज्य को बंद कर देना, पत्रकारों, सांसदों और पूर्व मुख्यमंत्रियों को जेल में डाल देना, और संचार व्यवस्था ठप कर देना” लोकतांत्रिक देश में स्वीकार्य नहीं हो सकता। “क्या एक लोकतांत्रिक देश में ऐसा करना सही है? क्या इसके खिलाफ आवाज उठाना गलत था?” उन्होंने सवाल किया।
विश्लेषण: कांग्रेस के लिए ‘बौद्धिक चेहरा’
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कन्नन गोपीनाथन का कांग्रेस में आना पार्टी के लिए “नैतिक और बौद्धिक मजबूती” का संकेत है। गोपीनाथन का प्रशासनिक अनुभव और नागरिक अधिकारों पर उनकी स्पष्ट सोच कांग्रेस को नीति-आधारित राजनीति में एक नया आयाम दे सकती है।
